पटना में होगा रामविलास पासवान का अंतिम संस्कार, आज ले जाया जाएगा शव

पटना में होगा रामविलास पासवान का अंतिम संस्कार, आज ले जाया जाएगा शव
रामविलास पासवान का अंतिम संस्कार पटना में शनिवार को किया जाएगा. वहीं, उनके निधन पर दिल्ली और अन्य राज्यों की राजधानियों में शुक्रवार को तिरंगा आधा झुका रहेगा.
  • KHABARSAFARMEDIA
  • LAST UPDATED: 9, October 2020, 9:11 AM IST

 पटना. दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान  (Ram Vilas Paswan) के पार्थिव शरीर को शुक्रवार दोपहर बाद 2 बजे पटना लाया जाएगा. इसके बाद पार्थिव शरीर को एयरपोर्ट से लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janshakti Party) के प्रदेश कार्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा. दिवंगत नेता के पार्थिव शरीर को पटना लोजपा कार्यालय से विधानसभा ले जाया जाएगा. इससे पहले स्वर्गीय पासवान के पार्थिव शरीर को आखिरी दर्शन के लिए सुबह 10 बजे उनके आवास 12 जनपथ पर अस्पताल से सीधा लाया जाएगा. शनिवार यानी 10 अक्टूबर को उनका अंतिम संस्कार पटना में ही किया जाएगा.

बता दें कि मोदी कैबिनेट में उपभोक्ता, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मामलों के मंत्री रामविलास पासवान की सेहत में लगातार गिरावट आ रही थी और दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में उनके दिल का ऑपरेशन 3 अक्टूबर को देर रात किया गया था. वह 24 अगस्त के बाद से ही लगातार परेशानी में थे और पिछले कुछ हफ्तों से अस्पताल में भर्ती थे.

रामविलास पासवान का दिल और किडनी ठीक से काम करना बंद कर दिया था. इस वजह से कुछ दिनों से उन्हें आईसीयू में एक्मो (एक्सट्रोकॉरपोरियल मेमब्रेंस ऑक्सीजनेशन) मशीन के सपोर्ट पर रखा गया था. गुरुवार की शाम 6:05 बजे उन्होंने दिल्ली के फोर्टिस अस्‍पताल में अंतिम सांस ली. वह 74 वर्ष के थे


रामविलास पासवान ने ही सन 2000 में लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना की थी. 2004 में वह तत्कालीन सत्तारूढ़ यूपीए में शामिल हो गए. पासवान को तब केंद्रीय रासायनिक और उर्वरक और स्टील मंत्री बनाया गया. पासवान ने साल 2004 का चुनाव तो जीता, लेकिन 2009 में हार गए. 2010 से 2014 तक राज्यसभा सांसद रहने के बाद वह एक बार फिर से 2014 में हाजीपुर सीट से लोकसभा सांसद के तौर पर चुने गए.
रामविलास पासवान 8 बार लोकसभा के सांसद रह चुके थे और फिलहाल वह राज्यसभा के सदस्‍य थे. पहली बार वह 1977 में हाजीपुर लोकसभा सीट से जनता पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा पहुंचे थे. इसके बाद वह 1980, 1989, 1996 और 1998, 1999, 2004 और 2014 में लोकसभा सदस्य के तौर पर देश की संसद पहुंचे थे.