कोरोना

चीन में और खतरनाक बनकर लौटा कोरोना, गुपचुप हमला कर रहा है नया वायरस

दुनिया में करीब 70 हजारों लोगों की जान ले चुके और 13 लाख लोगों को बीमार बना चुके कोरोना के खौफ से अभी दुनिया कांप ही रही है कि एक और नए कोरोना ने दस्तक दे दी है. ये नया कोरोना भी चीन के उसी हुबेई प्रांत से आया है जहां से पुराना कोरोना निकला था. जानकारों की मानें तो ये नया कोरोना पुराने कोरोना से भी कहीं ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इस नए कोरोना का कोई लक्षण ही नहीं है. यानी इसके शिकार शख्स को पता ही नहीं चलेगा कि वो संक्रमित है या नहीं?

एसिम्टोमैटिक केस का मतलब है कि कोई कोरोना से संक्रमित तो हो मगर उसमें इस बीमारी के कोई लक्षण नज़र ही ना आएं. मतलब इसकी जानकारी ना तो खुद उस
शख्स को होगी और ना ही बिना टेस्ट के कोई डॉक्टर इसका पता लगा पाएगा. सिर्फ टेम्प्रेचर चेक करने वाली मशीन तो इस संक्रमित मरीजों को पकड़ तक नहीं पाएगी.
एसिम्टोमैटिक कोरोना का मरीज कोविड-19 के आम मरीज से ज़्यादा खतरनाक होता है क्योंकि कम से कम उनमें कोरोना के लक्षण नजर आते हैं. दुनियाभर में कोरोना के जो मामले अब तक सामने आए हैं वो सिम्टोमैटिक केसेज थे यानी वो कोरोना से संक्रमित भी थे और उनमें इसके लक्षण भी साफ तौर पर दिखाई दे रहे थे इसलिए उनको पहचानना भी आसान था. वो खुद भी इस बात का ख्याल रखते थे कि उनकी वजह से ये संक्रमण किसी और में ना फैले मगर कोरोना के एसिम्टोमैटिक मामले सामने आने की वजह से ये खतरा ना सिर्फ चीनी अथॉरिटी और वहां के लोगों के लिए बहुत बड़ा हो गया है बल्कि पूरी दुनिया के लिए भी एक बड़ी चुनौती होगी
कोरोना का ‘नए खतरे’ से कैसे निपटे दुनिया? 

पहला इलाज- सरकारें लॉकडाउन को खत्म करने में जल्दी ना करें. पहले तसल्ली कर लें कि कोरोना के नए मामलों में कमी आ गई है और फिर उसका ऑब्जर्वेशन करने के बाद ही लॉकडाउन खोलें.

दूसरा इलाज- कोरोना से ठीक हुए मरीजों को फौरन समाज में जाने की इजाज़त ना हो और हर दूसरे दिन उनकी जांच की जाए ताकि वो कोरोना के एसिम्टोमैटिक के शिकार ना हो जाएं

हुबेई में लॉकडाउन हटाने और जिंदगी सामान्य करने की चीनी सरकार की कोशिश उल्टी पड़ गई और यहां अचानक कोरोना के 1541 एसिम्टोमैटिक मामले सामने आ गए हैं. यानी चीन में लॉकडाउन की मियाद पूरी करने के बाद भी जो नए मामले सामने आ रहे हैं वो ना सिर्फ पहले से भी ज़्यादा खतरनाक और जानलेवा हैं बल्कि इसमें नए पीड़ित मरीजों का पता लगाना कहीं ज्यादा मुश्किल है.

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