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हरियाणा: आर्थिक संकट से निपटने को बड़ा कदम: हरियाणा में अगले एक साल के लिए नई भर्ती पर रोक, कर्मचारियों की LTC भी बंद|

हरियाणा सरकार ने राज्‍य में नई भर्तियों पर राेक लगा दी है। सीएम मनोहरलाल ने कहा कि राज्‍य में एक साल तक कोई भर्ती नहीं होगी। कर्मचारियों की एलटीसी भी बंद कर दी गई है।

वित्तीय संकट से जूझ रहे हरियाणा ने लिए कई अहम निर्णय |

चंडीगढ़, [तरुण नरवाल ]।  हरियाणा में नए कर्मचारियों की भर्ती पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही हरियाणा सरकार ने राज्‍य के सरकारी कर्मचारियों को एलटीसी की सुविधा भी बंद कर दी है। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सोमवार को ऐलान किया। उन्‍होंने कहा कि कोरोना संकट के कारण सरकार खर्चों में कटौती कर रही है। इसके साथ ही हरियाणा सरकार ने अगले कुछ दिनों में राज्‍य के परिवहन साथ शुरू करने के भी संकेत दिए हैं।

दरअसल कोरोना महामारी की वजह से वित्तीय संकट से जूझ रही हरियाणा सरकार ने अपने खर्चे कम करने का निर्णय लिया है। कोरोना रिलीफ फंड में सरकार के पास अभी तक करीब दो सौ करोड़ रुपये आ चुके हैं और दान की अभी खूब दरकार है। खर्च कम करने और वित्‍तीय भार से बचने को प्रदेश सरकार ने अगले एक साल तक नई भर्तियां करने पर रोक लगाई है। इसके साथ ही साथ ही कर्मचारियों को लीव ट्रैवल कंसेशन (एलटीसी) की सुविधा नहीं मिलेगी। केंद्र सरकार की तर्ज पर हरियाणा के कर्मचारियों का भी महंगाई भत्ता (डीए) बंद करने के आदेश जल्द जारी हो सकते हैं।

रियाणा सरकार का नई भर्तियां नहीं करने, एलटीसी की सुविधा नहीं देने तथा डीए पर रोक लगाने का फैसला एक साल की अवधि तक है। प्रदेश सरकार एक साल के बाद कर्मचारियों की यह सुविधाएं बहाल कर सकती है। एरियर मिलेगा या नहीं, इस पर अभी सरकार ने स्थिति साफ नहीं की है। महामारी के बावजूद सरकार ने कर्मचारियों का वेतन, पेंशन, कर्ज की वापसी और ब्याज का भुगतान नहीं रोकने का फैसला किया है।

हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल ने साेमवार को कहा कि राज्‍य सरकार ने कोरोना के कारण पैदा हालात के कारण एक साल तक नए कर्मचारियों की भर्ती नहीं करने का फैसला किया है। उन्‍होंने कहा कि कोरोना के कारण बड़ा आर्थिक संकट पैदा हुआ है। इस कारण राज्‍य सरकार ने खर्चों में कटौती की है। इसी के तहत राज्‍य में एक साल तक सरकार ने नई भर्तियों पर राेक लगाने का फैसला किया है। राज्‍य के कर्मचारियों की एसटीसी सुविधा को भी एक साल के लिए रोक लगाई जा रही है।

मनोहरलाल ने कहा कि राज्‍य सरकार कोराेना से निपटने के लिए पूरा प्रयास कर रही है और सभी तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। उन्‍होंने कर्मचारियों के महंगाई भत्‍ते पर रोक के संबंध में भी स्थिति स्‍पष्‍ट की। उन्‍होंने कर्मचारियों के महंगाई भत्‍ते पर बस एक साल के लिए लगाया गया है। कोराेना संकट के कारण पैदा हालात से निपटने के लिए इस तरह के कदम उठाया जरूरी हो गया है।

वास्‍तव में हरियाणा सरकार इस समय वित्तीय संकट से जूझ रही है। सरकार के खजाने में जीएसटी, वैट, खनन, शराब, रजिस्ट्री और केंद्र सरकार से राज्य के हिस्से के रूप में धन आता है। कोरोना ने फिलहाल सब कुछ बंद कर रखा है। जीएसटी के 2200 करोड़ रुपये में से मात्र 700 करोड़ रुपये सरकार को मिले। मई में तीन हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। अप्रैल में साढ़े छह हजार करोड़ रुपये में से करीब दो हजार करोड़ रुपये के राजस्व के आने का अनुमान है। अगले तीन महीने तक वित्तीय व्यवस्थाएं इसी तरह से गड़बड़ाती रहेंगी। ऐसे में सरकार ने नए सस्ते कर्ज लेने से भी परहेज नहीं किया है।

सरकारी खर्चे कम करने की कड़ी में सरकार मंत्रियों के स्वैच्छिक कोटे पर पहले ही 51 करोड़ रुपये की कैंची चला चुकी है। अगले तीन माह तक विकास की नई परियोजनाएं भी शुरू होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। इसके लिए सरकरा के पास पर्याप्त बजट नहीं है। फिलहाल विकास के जो काम चल रहे हैं, उन्हें ही आगे बढ़ाए जाने का निर्णय लिया गया है।

हरियाणा की दलील है कि कांग्रेस शासित राज्य 12 फीसदी तक ही डीए देते हैं, जबकि हरियाणा 17 फीसदी डीए देता है। संकट की इस घड़ी में इसे सिर्फ एक साल के लिए टालने का प्रस्ताव है, जिसे बाद में अगली बार के डीए में शामिल कर देने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। ऐसे में कर्मचारियों को बहुत पेनिक होने की जरूरत नहीं है।

‘देश के सभी राज्यों में हरियाणा ने पहली बार खुलकर स्वीकार किया कि हम वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। इसका मतलब यह कतई नहीं कि खजाना खाली हो गया है। यह एक अनवरत प्रक्रिया है। पैसा आता है और चला जाता है। राजस्व आने के तमाम साधन बंद हैं। हमने केंद्र से अनुरोध किया है कि कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाया जाए। बैंकिंग का फाइनेंस सिस्टम इनक्रीज किया जाए। लोगों से दान भी मांगा जा रहा है। सरकार ने अपने खर्चों में कटौती करने का निर्णय लिया है। हमें कुछ पैसा केंद्र से भी मिला है। फिलहाल अपेक्षित राशि नहीं मिल पा रही है। संकट की इस घड़ी में सभी का सहयोग अपेक्षित है।

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