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आईपीओ / नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के मेगा आईपीओ में हो सकती है देरी, ग्रे मार्केट में वैल्यूएशन 10 प्रतिशत घटा

पिछले तीन सालों से अटका है एनएसई का आईपीओ

जल्द ही आईपीओ के लिए मर्चेंट बैंकर्स की होगी नियुक्ति दिसंबर में एनएसई के अधिकारी वित्त मंत्रालय से मिले थे

खबर सफर न्यूज

May 09, 2020, 04:40 PM IST

मुंबई. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आईपीओ में देरी हो सकती है। खबर है कि अनलिस्टेड मार्केट में इसके वैल्यूएशन में 10 प्रतिशत की गिरावट पिछले कुछ समय में आई है।

50,000 करोड़ है वैल्यूएशन

निवेशकों से मिली जानकारी के मुताबिक अनलिस्टेड मार्केट में एनएसई के शेयरों की कीमत 950 रुपए के भाव पर कारोबार कर रहे हैं। इस तरह से इसका वैल्यूएशन 50,000 करोड़ रुपए लगाया गया है। इसके पहले अप्रैल में यह शेयर 1,050 रुपए पर कारोबार कर रहा था। कई घरेलू और विदेशी निवेशकों ने हाल के महीनों में एनएसई के शेयर को 1,200 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से खरीदा है। इस भाव पर इसका वैल्यूएशन 60,000 करोड़ रुपए आंका गया है।

ढेर सारे ब्लू चिप स्टॉक में आई है गिरावट

विश्लेषकों के मुताबिक ढेर सारे ब्लू चिप स्टॉक्स के वैल्यूएशन में इसलिए गिरावट आई है क्योंकि बाजार में आईपीओ की समय सीमा को लेकर बड़े पैमाने पर अनिश्चितता बनी हुई है। साथ ही मार्केट का सेंटीमेंट भी इस समय ठीक नहीं है। इस तरह की ज्यादा मांग संस्थागत और अल्ट्रा एचएनआई ग्राहकों से आती है, पर यह मांग अभी सुस्त है। एनएसई के वैल्यूएशन में कमी की दूसरी वजह सेकेंडरी मार्केट में लगातार गिरावट भी है। बेंचमार्क सेंसेक्स इस साल में अब तक 24 प्रतिशत गिरा है। यह इसलिए क्योंकि निवेशकों ने सुरक्षित रास्ता अपनाया है और साथ ही कोविड-19 की महामारी और लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियां ठप हैं।

2021 की दूसरी छमाही में आईपीओ आने की उम्मीद

वैसे एनएसई में एक निवेशक होने की प्रक्रिया भी बहुत जटिल है। अगर आप इसके शेयर खरीदते या बेचते हैं तो आपको एनएसई के शेयरहोल्डर कमिटी में एक औपचारिक प्रपोजल भेजना होगा। यहां से आपकी डील को मंजूरी मिलेगी। हकीकत में एफआईआई और घरेलू निवेशकों का हिस्सा अलग-अलग किया जाता है, जहां पर दोनों एक दूसरे का शेयर नहीं खरीद सकते हैं। एनएसई के आईपीओ के बारे में अनुमान है कि यह वित्तीय वर्ष 2021 की दूसरी छमाही में आ सकता है। हालांकि पिछले तीन सालों से इसका आईपीओ अटका पड़ा है। इसका कारण यह है कि सेबी लगातार एनएसई और इसके टॉप अधिकारियों की जांच कर रहा था।

31 अक्टूबर तक सेबी ने लगाई है रोक

सेबी ने आरोप लगाया कि एनएसई के कुछ अधिकारी कुछ कारोबारियों और ब्रोकरों को को-लोकेशन की सुविधा दे रहे थे। यह सुविधा एक विशेष फीस पर दी जा रही थी। अप्रैल में सेबी ने एनएसई और इसके अधिकारियों के खिलाफ एक ऑर्डर पास किया जिसमें 31 अ्क्टूबर तक ये दोनों पूंजी बाजार में भाग नहीं ले सकते हैं। खबर है कि इनवेस्टमेंट बैंकर्स जल्द ही नियुक्त किए जा सकते हैं। दिसंबर में एनएसई ने इस संबंध में वित्त मंत्रालय से संपर्क किया था। हाल में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने एनएसई के 50 लाख शेयर 1,000 रुपए के मूल्य पर कनाडा के अरबपति प्रेम वात्सा को बेचा था।

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