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आत्मनिर्भर पैकेज: अडानी, वेदांता, टाटा पावर, अनिल अंबानी की रिलायंस को बड़ा फायदा!

प्रमुख लाभार्थियों में टाटा पावर, जेएसडब्ल्यू स्टील, GVK, हिंडाल्को और जीएमआर जैसी कंपनियों के अलावा अडानी, अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप, वेदांता और कल्याणी जैसे कारोबारी समूह होंगे.

नई दिल्ली, 17 मई 2020, अपडेटेड 08:20 PM IST

अडानी ग्रुप को कोयला, खनिज, रक्षा, बिजली वितरण क्षेत्र में बढ़ने का मौका हिंडाल्को कोयला और खनिज खनन परियोजनाओं को भुनाने में सक्षम होगाकेंद्र शासित प्रदेशों में बिजली कंपनियों के निजीकरण से होगा फायदा|

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पांच चरणों में राहत पैकेज के बारे में जानकारी दीं. शनिवार को चौथे प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में वित्त मंत्री ने औद्योगिक आधारभूत ढांचों का अपग्रेडेशन, कोयला, खनिज, रक्षा उत्पादन, एयरस्पेस मैनजमेंट, एयरपोर्ट्स, एमआरओ (मेंटनेंस, रिपेयर-ओवरहॉल), केंद्रशासित प्रदेशों में बिजली वितरण कंपनियां, अंतरिक्ष क्षेत्र और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सुधारों का ऐलान किया.

इन कंपनियों के लिए ‘अच्छे दिन’चौथे चरण में जो कदम उठाने का ऐलान किया है, उससे कई बड़े उद्योग घराने लाभार्थी होंगे. प्रमुख लाभार्थियों में टाटा पावर, जेएसडब्ल्यू स्टील, GVK, हिंडाल्को और जीएमआर जैसी कंपनियों के अलावा अडानी, अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप, वेदांता और कल्याणी जैसे कारोबारी समूह होंगे. अडानी ग्रुप को कोयला, खनिज, रक्षा, बिजली वितरण और हवाई अड्डों जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा. जबकि वेदांता और आदित्य बिड़ला ग्रुप के हिंडाल्को कोयला और खनिज खनन परियोजनाओं को भुनाने में सक्षम होगा.

कोल माइनिंग में नई कंपनियों की एंट्री

दरसअल वित्त मंत्री ने अपने ऐलान में आठ क्षेत्रों- कोयला, खनिज, डिफेंस प्रोडक्शन, हवाई क्षेत्र प्रबंधन, हवाई अड्डों, केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण कंपनियों, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में रणनीतिक सुधारों की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड की खदाने भी प्राइवेट सेक्टर को दी जाएंगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा खनन हो सके और देश के उद्योगों को बल मिले. 50 ऐसे नए ब्लॉक नीलामी के लिए उपलब्ध होंगे.

वित्त मंत्री ने कहा कि 6 और एयरपोर्ट्स की नीलामी होगी. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया यह काम करेगी. इस तरह कुल 12 एयरपोर्ट की नीलामी पूरी होगी. इनमें से कई परियोजनाएं लंबे वक्त तक के लिए हैं, और इससे कोरोना संकट को तुरंत मदद की संभावना नहीं है.

सरकार इस ऐलान के बाद अडानी पावर, टाटा पावर, जेएसडब्ल्यू एनर्जी और रिलायंस पावर जैसी निजी कंपनियां कोल ब्लॉक के लिए बोली लगाएंगी और इस इंडस्ट्रीज के लिए जो राहत पैकेज दिए गए हैं, उसका फायदा इन कंपनियों को मिलेगा. कई स्टील कंपनियां भी कोकिंग कोल के कुछ खानों के लिए नीलामी में हिस्सा ले सकती हैं. 50 नए कॉल ब्लॉक्स नीालामी के लिए उपलब्ध होंगे.

500 माइनिंग ब्लॉक की होगी नीलामीवहीं सरकार बॉक्साइट और कोयला खानों की नीलामी को क्लब करना चाहती है ताकि एल्यूमिनियम निर्माता एक साथ बोली लगा सकें. सरकार के इस कदम से हिंडाल्को और वेदांता एल्युमीनियम जैसी कंपनियों को मदद मिलेगी. सरकारी ऐलान के मुताबिक 500 माइनिंग ब्लॉक की नीलामी की जाएगी. माइनिंग लीज का ट्रांसफर भी किया जा सकेगा.

वित्त मंत्री ने कहा कि कैप्टिव और नॉन कैप्टिव माइंस की परिभाषा बदलेगी. इसका मतलब है कि मौजूदा कैपिटल यूजर जैसे टाटा पावर, रिलायंस पावर और टाटा स्टील को अपने साथ कोयला खनन लाइसेंस बनाए रखने के लिए नियमित अंतराल पर बोली लगानी होगी|

एयरपोर्टस में अडानी ग्रुप का दबदबापिछले दिनों 6 हवाई अड्डों – अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम, लखनऊ, मंगलुरु, गुवाहाटी और जयपुर के निजीकरण के लिए अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी थी. अब नई बोली में भी यह ग्रुप भाग ले सकता है. वहीं अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को पिछले साल राजकोट हवाई अड्डे के लिए 648 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला था. वहीं जीएमआर और जीवीके ग्लोबल लेवल पर इस सेक्टर में स्थापित खिलाड़ी हैं.

रक्षा में FDI से इन कंपनियों को मिलेगा बलइसके अलावा रक्षा उत्पादन में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) को सरकार ने 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दिया गया है. कई भारतीय कंपनियों ने बीते दिनों विदेशी रक्षा निर्माताओं के साथ कई संयुक्त उपक्रमों का गठन किया था, लेकिन अधिकांश बड़ी परियोजनाओं को लेने में विफल रहे थे, क्योंकि विदेशी भागीदार परियोजनाओं में अपनी बौद्धिक पूंजी के कारण ज्यादा हिस्सेदारी चाहते थे. अडानी और अनिल अंबानी समूह की कंपनियों ने पिछले दिनों भारत में प्रोडक्शन के लिए विदेशी कंपनियों के साथ समझौता किया था. जबकि पुणे स्थित कल्याणी समूह के पास बड़ा रक्षा प्रोडक्ट का कारोबार है.

बिजली कंपनियों के निजीकरण से अडानी का बढ़ेगा कारोबार?वहीं वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली कंपनियों का निजीकरण होगा. इससे विद्युत उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा. उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए प्रीपेड बिजली के मीटर लगाए जाएंगे. अडानी और टाटा पावर इस सेक्टर के बड़े खिलाड़ी हैं. अडानी ने 2017 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के मुंबई वितरण कारोबार को खरीदकर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा ली है. जबकि पिछले हफ्ते, अनिल अंबानी समूह ने अपने दिल्ली बिजली वितरण कारोबार को भी बिक्री का ऐलान किया है.

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