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US में कोविड के उपचार में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल बंद, भारतीय कंपनियों को झटका

अमेरिका के इस निर्णय से सिप्ला, इप्का, जायडस कैडिला जैसी कई भारतीय कंपनियों को झटका लगा है. अमेरिका के ड्रग रेगुलेटर का अब कहना है कि ऐसा कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना संक्रमित लोगों के उपचार में प्रभावी है.

ख़बर सफ़र न्यूज

नई दिल्ली, 16 जून 2020, अपडेटेड 09:30 PM IST

  • कोविड-19 के उपचार में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल पर रोक
  • अमेरिका के ड्र्रग नियामक ने इसके इस्तेमाल पर अब रोक लगाईइससे कई भारतीय कंपनियों के कारोबार को भारी नुकसान होगा

अमेरिकी सरकार ने कोविड-19 के उपचार में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) के इस्तेमाल को रोक दिया है. अमेरिका के इस निर्णय से सिप्ला, इप्का, जायडस कैडिला जैसी कई भारतीय कंपनियों को झटका लगा है.

क्या कहा अमेरिकी ड्रग रेगुलेटर ने

असल में अमेरिका के ड्रग रेगुलेटर का अब कहना है कि ऐसा कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना संक्रमित लोगों के उपचार में प्रभावी है. जबकि इसके पहले अमेरिका कोरोना के उपचार के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल में सबसे आगे था.

खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी सराहना की थी और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर इस दवा की खेप भेजने का अनुरोध किया था. ट्रंप ने इसे कोरोना के उपचार में ‘गेम चेंजर’ बताया था. भारत ने इस दवा के निर्यात पर रोक लगा रखी थी, इसके बावजूद मानवीयता दिखाते हुए अमेरिका को इसके निर्यात की इजाजत दी गई. यही नहीं अमेरिका के बाद तो एक दर्जन से ज्यादा देशों में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन सल्फेट (HCQ) की मांग आने लगी और भारत ने सभी को कुछ न कुछ खेप भेजी.

अमेरिका के फूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने अब चेतावनी दी है कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल रेमडेसिविर के साथ न किया जाए. रेमडेसिविर भी एक एंटी मलेरिया दवा है जिसका निर्माण एक अमेरिकी कंपनी द्वारा किया जाता है.

भारतीय कंपनियां जायडस कैडिला और इप्का लेबोरेटरीज हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के सबसे बड़े उत्पादकों में से हैं. अमेरिका के एफडीए ने 28 मार्च को खुद ही हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल के लिए आपातकालीन रूप से इजाजत दी थी. यह कहा गया था कि एंटी मलेरिया दवा क्लोरोक्वीन फास्फेट और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन सल्फेट (HCQ) कोविड-19 के उपचार में उपयोगी हैं. अब एफडीए ने कहा है कि इसकी प्रभा​वशीलता के बारे में कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं हैं और इसके संभावित साइड इफेक्ट हो सकते हैं.

इन भारतीय कंपनियों को होगा नुकसान

अमेरिकी सरकार के इस कदम से इन उत्पादकों को भारी नुकसान हो सकता है. भारत की सिप्ला, इप्का लेबोरेटरीज, जायडस कैडिला, डॉ. रेड्डीज, जुबिलैंट, हेटेरो, सिनजीन जैसी करीब आधा दर्जन कंपनियां 120 देशों में इस दवा का निर्यात करती हैं.

हाल में केंद्र सरकार ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात से पूरी तरह रोक हटाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है. इस दवा के कॉमर्शियल निर्यात पर केंद्र सरकार ने गत 25 मार्च को रोक लगा दी थी. हालांकि मानवीय आधार पर कई देशों को इसकी खेप भेजी गई. लेकिन इसका निर्यात निजी कंपनियों को नहीं सिर्फ सरकारों को किया जा रहा था.

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