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कोरोना में कर्मचारियोंं की छंटनी पर रतन टाटा: महामारी के दौर में आप अपने कर्मचारियों के साथ ऐसा बर्ताव करते हैं, क्या यही आपकी नैतिकता है?

रतन टाटा ने कहा- जब देश में कोरोनावायरस का प्रकोप शुरू ही हुआ था तभी हजारों लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया

आप इस माहौल में तब तक जीवित नहीं रहेंगे, जब तक कि आप संवेदनशील नहीं होते

कोरोना महामारी की वजह से हो रही छंटनी को लेकर नाराजगी जताई।

Updated: Fri,24 Jul 2020 05:20 PM (IST)

टाटा समूह के संरक्षक रतन टाटा ने गुरुवार एक इंटरव्यू के दौरान कोरोना महामारी की वजह से हो रही छंटनी को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कोरोना के मुश्किल दौर में लोगों के प्रति कंपनियों की जिम्मेदारी बनती है। जिन्होंने आपको लिए काम किया, आपने उन्हें ही छोड़ दिया।

उन्होंने योरस्टोरी को दिए एक इंटरव्यू में कहा,  ‘‘उद्यमियों और कंपनियों के लिए लंबे समय तक काम करने और अच्छा प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता जरूरी है। महामारी के दौर में आप अपने कर्मचारियों के साथ ऐसा बर्ताव करते हैं, क्या यही आपकी नैतिकता है?’’

वायरस आते ही हजारों लोगों की नौकरियां चली गईं
उन्होंने कहा, ‘‘जब देश में वायरस का प्रकोप शुरू ही हुआ था, तभी हजारों लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया। क्या इससे समस्या हल हो सकती है? मुझे नहीं लगता कि ऐसा हो सकता है। आपको बिजनेस में नुकसान हुआ है, ऐसे में लोगों को नौकरी से निकाल देना सही नहीं है, बल्कि उनके प्रति आपकी जिम्मेदारी बनती है।’’

‘‘हम खुद को यह कहते हुए अलग नहीं कर पाएंगे कि हम ऐसा करना जारी रखेंगे, क्योंकि हम अपने शेयरधारकों के लिए ऐसा कर रहे हैं। आप इस माहौल में तब तक जिंदा नहीं पाएंगे, जब तक आप संवेदनशील नहीं रहते। सबसे पहले लोगों को कार्यस्थल के बारे में चिंतित होना चाहिए।’’

महामारी आपको सभी जगह हिट करेगी
रतन टाटा के मुताबिक, ‘‘आपके पास छिपने या भागने के लिए कोई जगह नहीं है, आप जहां भी जाते हैं, कोविड-19 महामारी आपको हिट करती है। ऐसे में बेहतर है कि स्थिति को स्वीकारें। आपको उन बातों में बदलाव करना होगा, जिन्हें आप अच्छा मानते हैं या जो जिंदा रहने के लिए जरूरी है।’’

कोरोना महामारी ने कई सेक्टर में बिजनेस को मुश्किल में डाल दिया है। इसलिए कंपनियों ने बिजनेस में बने रहने के लिए छंटनी और वेतन कटौती का सहारा लिया है। बढ़ती महामारी के कारण स्टार्टअप इकोसिस्टम से कई यूनिकॉर्न (7.4 हजार करोड़ रुपए वैल्यूएशन वाले स्टार्टअप्स) जैसे ओला, ओयो, स्विगी और जोमैटो को कर्मचारियों के साथ-साथ बिजनेस को भी कम करना पड़ा।

जिन मजदूरों ने आपके लिए काम किया, उन्हें छोड़ दिया
रतन टाटा ने महामारी के चलते प्रवासी और दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति के बारे कहा कि आय का कोई सोर्स नहीं होने के कारण लॉकडाउन के दौरान प्रचंड गर्मी में बिना किसी साधन के उन्होंने घर वापसी की। देश की सबसे बड़ी श्रमशक्ति को कह दिया गया आपके लिए कोई काम नहीं है और आपको घर भेजने की व्यवस्था भी नहीं है। उनके रहने-खाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। ऐसा करने वाले आप कौन होते हैं?’’

‘‘ये वे लोग हैं, जिन्होंने आपके लिए काम किया है। ये वही लोग हैं, जिन्होंने अपने पूरे करियर के दौरान आपकी सेवा की है, इसलिए आप उन्हें बारिश में रहने के लिए छोड़ देते हैं? आप अपनी लेबर फोर्स के साथ इस तरह का बर्ताव करते हैं, क्या आपकी नैतिकता की यही परिभाषा है?’’

ऐसे हालात फिर बने, तो लोगों को बेहतर समझ होगी
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि हम इस तरह के हालात फिर से नहीं देखेंगे। अगर हमारे सामने इस तरह के हालात दोबारा आते हैं, तो मुझे लगता है कि आपकी बेहतर समझ होगी कि लोगों के लिए क्या किया जा सकता है, बजाय इसके कि उन्हें नौकरी से निकाला जाए।’’

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