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हरियाणा सरकार ने पहलवान बबीता फौगाट और कविता को खेल विभाग में उपनिदेशक बनाया

दंगल गर्ल अर्जुन अवार्डी पहलवान बबीता फौगाट को और जींद की कबड्डी प्‍लेयर कविता को हरियाणा सरकार ने खेल विभाग में उप निदेशक बनाया है। बबीता फौगाट बीजेपी नेत्री भी हैं।

Updated: Fri,31 Jul 2020 03:40 PM (IST )

चरखी दादरी, जेएनएन। दंगल गर्ल, अर्जुन अवार्डी पहलवान बबीता फौगाट और जींद की कबड्डी प्‍लयेर कविता को हरियाणा सरकार द्वारा खेल विभाग में उप निदेशक नियुक्त किया गया है। बबीता फौगाट को खेल विभाग में डिप्टी डायरेक्टर लगाए जाने से उनके परिवार सहित क्षेत्र में भी खुशी का माहौल बना हुआ है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 में स्वर्ण पदक जीत चुकी बबीता फौगाट अगस्त 2019 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई थी। भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने हरियाणा पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। सितंबर 2019 में पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया था। बाद में भारतीय जनता पार्टी द्वारा 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्हें दादरी से प्रत्याशी बनाया गया था।

हालांकि वे इस चुनाव में हार गई थी। लेकिन तब से ही वे राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय रही हैं। पार्टी के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के साथ ही बबीता फौगाट सोशल मीडिया पर भी पूरी तरह एक्टिव रहती है। देश के ज्वलंत मुद्दों पर बबीता फौगाट सोशल मीडिया खासकर ट्वीटर पर बेबाकी से अपने विचार रखती हैं। ट्वीट से सुर्खियों में रह चुकी हैं बबीता गौरतलब है कि गत अप्रैल माह में पहलवान बबीता फौगाट देश में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों में हुई वृद्धि का कारण तब्लीगी जमात के लोगों को बताकर सुर्खियों में आ गई थी। उस समय बबीता ट्रोलर्स के निशाने पर भी आ गई थी। बबीता ने साफ कह दिया था कि वे धमकियों से डरने वाली नहीं है। उसी दौरान हजारों की संख्या में लोग उनके समर्थन में भी आ गए थे। गांव बलाली निवासी द्रोणाचार्य अवार्डी पहलवान महावीर फौगाट ने उनकी बेटी बबीता फौगाट को खेल विभाग में उप निदेशक बनाए जाने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल व खेल मंत्री संदीप ¨सह का आभार जताया है। महावीर फौगाट ने कहा कि खेल से जुड़े लोगों को विभाग के उच्च पदों पर नियुक्त करने से खेल व खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए और बेहतर योजनाएं बनेंगी।

लड़कों के साथ खेलती थीं इंटरनेशनल प्‍लेयर कविता

खेल विभाग में डिप्टी डायरेक्टर बनने वाली कविता नेशनल स्टाइल महिला कबड्डी में 15 साल से देश का नाम रोशन कर रही है। कविता सिवाच ने अपनी उपलब्धियों के बूते कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर यह नौकरी हासिल की है। कविता का संघर्ष वीर रस की कविता की तरह है। उसके संघर्ष में उत्तेजना है, गर्जना है, जोश है और आत्मविश्वास है। जींद के गांव पड़ाना की बेटी कविता ने बचपन से ही संघर्ष करना सीखा है। जब वह चौथी कक्षा में पढ़ती थी, तभी से ग्राउंड पर जाना शुरू कर दिया था। शुरू में गांव के स्कूल में लड़कों के साथ खो-खो खेलती थी। छठी में खेल स्कूल निडाना में दाखिला लिया और कुश्ती के दाव-पेंच लगाने शुरू किए। करीब तीन साल तक कुश्ती की और इस दौरान जूनियर नेशनल में पदक भी झटके। कंधे की इंजरी बढऩे के कारण कुश्ती करना छूट गया। लेकिन कविता ग्राउंड से दूर नहीं रह सकती थी। इसलिए कबड्डी खेलना शुरू कर दिया। पिता किसान थे और ज्यादा खर्च नहीं उठा सकते थे, ऐसे में निडानी खेल स्कूल के प्रबंधक दलीप मलिक ने खूब आर्थिक सहयोग किया। कविता की प्रतिभा को देखते हुए फीस माफ कर दी। कविता ने भी पहले साल से ही कबड्डी में शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2005 में पहली बार नेशनल खेला और इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। पांच बार इंटरनेशनल और 28 बार नेशनल गेम्स में दम दिखाकर अवार्ड जीते।

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